Top 5 Best Akbar Birbal ki Kahani In Hindi: अकबर बीरबल की कहानी

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Top 5 Best Akbar Birbal ki Kahani In Hindi अकबर बीरबल की कहानी इन हिंदी:- दोस्तों आपलोगो ने अकबर बीरबल की कहानियां तो सुनी या पढ़ी ही होंगी लेकिन आज हम आपके लिए ५ बेस्ट अकबर बीरबल की कहानिया लेकर आए हैं जो शायद ही आपने कही पढ़ी या सुनी हो। ये अकबर बीरबल की कहानिया हमने गांव-कस्बों के अपने बुजुर्ग लोगों से एकत्रित की है, जो बहुत ही कम लोगों की जानकारी में है। ये कहानियां हमें मनोरंजन के साथ साथ कुछ सिखाकर भी जाती है तो इन कहानियों को एक पढना शुरू करे।

Akbar Birbal Ki Kahaniya In Hindi

#1 चौथ का चांद – अकबर बीरबल की कहानी

अकबर-बीरबल निकले यात्रा पर ईरान, रुके वह वहां के नवाब के बनकर मेहमान। दो दिन रूके वह दोनों, खूब हुई खातिरदारी, फिर आई वापिस लौटने की बारी। नवाब ने बीरबल को जान चतुर सुजान, किया एक टेढ़ा-सा सवाल।

उन्होंने पूछा- ‘मेरे एक सवाल का जवाब दोगे? अपने शहंशाह और मेरी तारीफ एक साथ कैसे करोगे?’

बीरबल थोड़ा सोच में पड़ गए, फिर उनकी अकल के ताले खुल गए।

बीरबल ने दिया जवाब, ‘आप दोनों ही चांद हैं जनाब। मेरे शहंशाह हैं चौथ का चांद तो आप हैं पूरा चांद!’

जवाब सुनकर ईरान के नवाब बेहद खुश हो गए, लेकिन अकबर उस समय कुछ न बोले गुमसुम हो गए। रास्ते भर अकबर रहे बीरबल से बेहद खफा, उन्हें समझ में नहीं आ रहा था उसका फलसफा।

अकबर की नाराजी को बीरबल ताड़ गए, क्यों हैं शहंशाह खफा, कारण भी जान गए।

बोले- ‘महाराज आप कुछ सोच रहे हैं, मन ही मन मुझे कोस रहे हैं। पर मैं बताता हूं आपको सच, आपकी तरक्की के बारे में ही सोचता हूं मैं बस। उनको कहा मैंने पूरा चांद, जो धीर-धीरे घटने लगता है श्रीमान। पर आपको बताया चौथ का चांद जो हर रात बढ़ता है और बढ़ता है जिसका मान। आप तो बढ़ते ही जाएंगे और जगह-जगह अपना मकाम बनाएंगे। अब कहिए तो सही, मैंने कौन-सी गलत बात कही?’

बीरबल की बात सुनकर अकबर मुस्कुरा दिए, एक बार फिर बीरबल की अक्ल का लोहा मान गए।

#2 सबसे बड़ा कौन है – अकबर बीरबल की कहानी

बादशाह अकबर को अपना शाही बाग़ बेहद पसंद था. अपने खाली समय में वे अक्सर वहाँ सैर के लिए जाया करते थे. एक दिन हमेशा की तरह वे शाही बाग़ में टहल रहे थे. बीरबल भी उनके साथ था.

टहलते-टहलते वे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे. चर्चा का मुख्य मुद्दा अकबर की हाल ही में पड़ोसी राज्यों और क्षेत्रों पर हुई जीतें थे. अचानक अकबर के दिमाग में एक प्रश्न कौंधा और हमेशा की तरह उन्होंने वह प्रश्न बीरबल से पूछ लिया.

प्रश्न था : “सबसे बड़ा कौन है?”

दिल ही दिल में अकबर की चाहत थी कि बीरबल उसकी जीतों के बारे में बखान करे और साथ ही उसकी बहादुरी और नेतृत्वक्षमता की भी.

लेकिन अकबर की उम्मीदों के विपरीत बीरबल ने इस उत्तर दिया, “जहाँपनाह! सबसे बड़ा तो बच्चा ही होता है.”

अकबर को बीरबल का ये उत्तर बड़ा अटपटा लगा. साथ ही अपना मनचाहा उत्तर न मिलने पर थोड़ा बुरा भी लगा. उन्होंने बीरबल से अपनी बात सिद्ध करने को कहा. बीरबल समझ गया कि अकबर उसके उत्तर से ख़ुश नहीं है. उसने ४८ घंटों का समय मांगा. अकबर ने उसे समय प्रदान कर दिया.

समय मिलने के बाद बीरबल अपने एक मित्र के पास गया और उससे सहायता मांगी. उसके मित्र का एक बहुत ही प्यारा २ साल का बेटा था. बीरबल उसे अपने साथ राजमहल ले जाना चाहता था. मित्र ने उसे अनुमति दे दी और बीरबल बच्चे को लेकर अकबर के दरबार में चला आया.

बीरबल के साथ एक प्यारे से बच्चे को देखकर अकबर बहुत ख़ुश हुए और बीरबल से उसे अपने पास लाने को कहा. जब बीरबल बच्चे को अकबर के पास ले गया, तो उन्होंने उसे अपनी गोद पर बिठा लिया.

बच्चा अकबर की गोद में बैठकर मज़े से खेलने लगा. अकबर उसकी बालक्रीड़ा देखकर हँसने लगे. कुछ पलों के लिए वे राज-पाट की सारी चिंता भूल गए और उस बच्चे के साथ का आनंद लेने लगे.

अचानक खेलते-खेलते बच्चे को जाने क्या हुआ कि उसने अकबर की मूँछे पकड़कर खींच दी. बच्चे की इस हरक़त से अकबर दर्द से चीख उठे. उन्हें बहुत गुस्सा आया. वे बीरबल पर चिल्लाने लगे, “बीरबल! तुम इस गुस्ताख़ बच्चे को मेरे दरबार में क्यों लाये हो? इसे अभी यहाँ से ले जाओ, नहीं तो हम इसे सज़ा दे देंगे.”

बीरबल को ये समय सही लगा, अपनी बात रखने का. वह बोला, “जहाँपनाह! मैं ये बच्चा अपनी बात सिद्ध करने के उद्देश्य से लाया था. आप मेरी बात समझे या नहीं? इस समय ये बच्चा आपसे भी बड़ा है. यदि ऐसा नहीं होता, तो इसमें इतनी हिम्मत ही नहीं होती कि ये आपकी मूँछ खींच सके. इसकी जगह कोई और होता, तो उसकी आपको तकलीफ़ पहुँचाने की जुर्रत ही नहीं होती और यदि वह ऐसा कर भी लेता, तो ज़िन्दा नहीं बचता.”

अकबर बीरबल का उत्तर सुनकर हैरान रह गए. बीरबल बिलकुल सही था. वह बच्चा उन्हें तकलीफ़ पहुँचाने की हिमाक़त कर भी जीवित था और मुस्कुरा रहा था. बीरबल ने बहुत ही चतुराई से अपनी बात सिद्ध कर दी थी.

बीरबल की बात सुनकर अकबर का गुस्सा शांत हो गया. उन्होंने बच्चे को गले से लगा लिया और बीरबल की बहुत प्रशंसा की.

#3 अकबर का साला: अकबर-बीरबल की कहानी

Akbar Birbal ki Kahani In Hindi

अकबर का साला हमेशा से ही बीरबल की जगह लेना चाहता था। अकबर जानते थे कि बीरबल की जगह ले सके ऐसा बुद्धिमान इस संसार में कोई नहीं है। फिर भी जोरू के भाई को वह सीधी ‘ना’ नहीं बोल सकते थे। ऐसा कर के वह अपनी लाडली बेगम की बेरुखी मोल नहीं लेना चाहते थे। इसीलिए उन्होने अपने साले साहब को एक कोयले से भरी बोरी दे दी और कहा कि-

जाओ और इसे हमारे राज्य के सबसे मक्कार और लालची सेठ – सेठ दमड़ीलाल को बेचकर दिखाओ , अगर तुम यह काम कर गए तो तुम्हें बीरबल की जगह वज़ीर बना दूंगा।

अकबर की इस अजीब शर्त को सुन कर साला अचंभे में पड़ गया। वह कोयले की बोरी ले कर चला तो गया। पर उसे पता था कि वह सेठ किसी की बातो में नहीं आने वाला ऊपर से वह उल्टा उसे ही चूना लगा देगा। हुआ भी यही सेठ दमड़ीलाल ने कोयले की बोरी के बदले एक ढेला भी देने से इनकार कर दिया।
साला अपना सा मुंह लेकर महल वापस लौट आया और अपनी हार स्वीकार कर ली.
अब अकबर ने वही काम बीरबल को करने को कहा।
बीरबल कुछ सोचे और फिर बोले कि सेठ दमड़ीलाल जैसे मक्कार और लालची सेठ को यह कोयले की बोरी क्या मैं सिर्फ कोयले का एक टुकड़ा ही दस हज़ार रूपये में बेच आऊंगा। यह बोल कर वह तुरंत वहाँ से रवाना हो गए।
सबसे पहले उसने एक दरज़ी के पास जा कर एक मखमली कुर्ता सिलवाया। हीरे-मोती वाली मालाएँ गले में डाली। महंगी जूती पहनी और कोयले को बारीक सुरमे जैसा पिसवा लिया।

फिर उसने पिसे कोयले को एक सुरमे की छोटी चमकदार डिब्बी में भर लिया। इसके बाद बीरबल ने अपना भेष बदल लिया और एक मेहमानघर में रुक कर इश्तिहार दे दिया कि बगदाद से बड़े शेख आए हैं। जो करिश्माई सुरमा बेचते हैं। जिसे आँखों में लगाने से मरे हुए पूर्वज दिख जाते हैं और यदि उन्होंने कहीं कोई धन गाड़ा है तो उसका पता बताते हैं। यह बात शहर में आग की तरह फ़ैली।

सेठ दमड़ीलाल को भी ये बात पता चली। उसने सोचा ज़रूर उसके पूर्वजों ने कहीं न कहीं धन गाड़ा होगा। उसने तुरंत शेख बने बीरबल से सम्पर्क किया और सुरमे की डिब्बी खरीदने की पेशकश की। शेख ने डिब्बी के 20 हज़ार रुपये मांगे और मोल-भाव करते-करते 10 हज़ार में बात तय हुई।
पर सेठ भी होशियार था, उसने कहा मैं अभी तुरंत ये सुरमा लगाऊंगा और अगर मुझे मेरे पूर्वज नहीं दिखे तो मैं पैसे वापस ले लूँगा।
बीरबल बोला, “बिलकुल आप ऐसा कर सकते हैं, चलिए शहर के चौराहे पर चलिए और वहां इसे जांच लीजिये।”
सुरमे का चमत्कार देखने के लिए भीड़ इकठ्ठा हो गयी।

तब बीरबल ने ऊँची आवाज़ में कहा, “ये सेठ अभी ये चमत्कारी सुरमा लगायेंगे और अगर ये उन्ही की औलाद हैं जिन्हें ये अपना माँ-बाप समझते हैं तो इन्हें इनके पूर्वज दिखाई देंगे और गड़े धन के बारे में बताएँगे। लेकिन अगर आपके माँ-बाप में से किसी ने भी बेईमानी की होगी और आप उनकी असल औलाद नहीं होंगे तो आपको कुछ भी नहीं दिखेगा।
और ऐसा कहते ही बीरबल ने सेठ की आँखों में सुरमा लगा दिया।

फिर क्या था, सिर खुजाते हुए सेठ ने आँखें खोली। अब दिखना तो कुछ था नहीं, पर सेठ करे भी तो क्या करे!
अपनी इज्ज़त बचाने के लिए सेठ ने दस हज़ार बीरबल के हाथ थमा दिये। और मुंह फुलाते हुए आगे बढ़ गए।
बीरबल फ़ौरन अकबर के पास पहुंचे और रुपये थमाते हुए सारी कहानी सुना दी।

अकबर का साला बिना कुछ कहे अपने घर लौट गया। और अकबर-बीरबल एक दूसरे को देख कर मंद-मंद मुसकाने लगे। इस किस्से के बाद फिर कभी अकबर के साले ने बीरबल का स्थान नहीं मांगा।

#4 चोर की दाढ़ी में तिनका : अकबर बीरबल की कहानी

एक बार की बात है. बादशाह अकबर (Akbar) की हीरे की अंगूठी गुम हो गई. उन्होंने उसे काफ़ी तलाशा, लेकिन वह नहीं मिली.

उन्होंने इस बात का ज़िक्र बीरबल (Birbar) से किया, तो बीरबल ने पूछा, “हुज़ूर! क्या आपको याद है कि आपने वह अंगूठी कहाँ उतारी थी?”

कुछ देर सोचने के बाद अकबर ने जवाब दिया, “नहाने जाने के पहले मैंने वह अंगूठी उताकर पलंग के पास रखे संदूक में रख दी थी. नहाकर आने के बाद मैंने देखा कि अंगूठी गायब है.”

“हुज़ूर! तब तो हमें संदूक सहित इस पूरे कमरे की अच्छी तरह तलाशी लेनी चाहिए. अंगूठी यहीं–कहीं होगी.” बीरबल बोला.

“लेकिन वह यहाँ नहीं है. मैंने सेवकों से कहकर संदूक तो क्या, कमरे के हर कोने को तलाशा. पर अंगूठी कहीं नहीं मिली.” अकबर ने कहा.

“तब तो आपकी अंगूठी गुमी नहीं है हुज़ूर, चोरी हुई है और चोर आपके सेवकों में से ही कोई एक है. आप इस कमरे की साफ़-सफ़ाई करने वाले सेवकों को बुलवाइए.”

अकबर ने सभी साफ़-सफ़ाई करने वाले सेवकों को बुलवा लिया. वे कुल ६ लोग थे.

बीरबल ने उनसे अंगूठी के बारे में पूछा, तो सबने अनभिज्ञता ज़ाहिर की. तब बीरबल बोला, “लगता है कि अंगूठी चोरी हो गई है. बादशाह सलामत ने अंगूठी संदूक में रखी थी. इसलिए अब संदूक ही बताएगा कि चोर कौन है?”

यह कहकर बीरबल संदूक के पास गया और कान लगाकर कुछ सुनने की कोशिश करने लगा. फिर सेवकों को संबोधित कर बोला, “संदूक ने मुझे सब कुछ बता दिया. अब चोर का बचना नामुमकिन है. जो चोर है उसकी दाढ़ी में तिनका है.”

ये सुनना था कि ६ सेवकों में से एक ने नज़रें बचाते हुए अपनी दाढ़ी पर हाथ फ़िराया. बीरबल की नज़र ने उसे ऐसा करते देख लिया. उसने फ़ौरन उस सेवक को गिरफ़्तार करने का आदेश दे दिया.

कड़ाई से पूछताछ करने पर उस सेवक ने सच उगलकर अपना दोष स्वीकार कर लिया. बादशाह को बीरबल की अक्लमंदी से अपनी अंगूठी वापस मिल गई.

#5 बुद्धि से भरा घड़ा : अकबर बीरबल की कहानी

एक बार किसी बात पर अकबर बीरबल से नाराज़ हो गए और उन्होंने बीरबल को राज्य छोड़कर कहीं दूर चले जाने का आदेश दे दिया. बीरबल ने अकबर के आदेश का पालन किया और राज्य छोड़कर चले गए.

कुछ समय बीतने के बाद अकबर को बीरबल की याद आने लगी. कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बीरबल का मशवरा अकबर को निर्णय लेने में मदद करता था. इसलिए बीरबल के बिना निर्णय लेने में अकबर को असुविधा होने लगी.

आखिरकार, उन्होंने अपने सैनिकों को बीरबल को ढूंढने के लिए भेजा. सैनिकों के कई गाँव में बीरबल को ढूंढने का प्रयास किया. लेकिन बीरबल नहीं मिले. कई जगहों पर पूछताछ करने के बाद भी बीरबल का पता-ठिकाना नहीं मिल सका और अकबर के पास सैनिक बैरंग लौट आये.

अकबर किसी भी सूरत में बीरबल को वापस लाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने एक युक्ति सोची. सैनिकों के माध्यम से उन्होंने अपने राज्य के सभी गाँवों के मुखियाओं को संदेश भिजवाया. संदेश इस प्रकार था –

‘एक माह के भीतर एक घड़े बुद्धि भरकर उस घड़े के साथ दरबार में उपस्थित हो. ऐसा न कर पाने की स्थिति में बुद्धि की जगह घड़े में हीरे-जवाहरात भरकर देना होगा.’

अकबर का ये संदेश सैनिकों द्वारा गाँव-गाँव में प्रसारित किया गया. एक गाँव में बीरबल भेष बदलकर एक किसान के खेत पर काम किया करते थे. जब उस गाँव ने मुखिया को अकबर का ये संदेश मिला, तो वो चिंतित हो उठा.

उसने गाँव के लोगों की सभा बुलाई. बीरबल भी उस सभा में उपास्थित हुआ. गाँव के मुखिया ने अकबर का संदेष गाँव वालों को दिया, तो सभी सोच में पड़ गए. तब बीरबल ने मुखिया से आग्रह किया, “महाशय! आप मुझे एक घड़ा दे दें. मैं उसे इन महीने के अंत तक उसे बुद्धि से भर दूंगा.”

मुखिया के पास और कोई चारा नहीं था. उसने एक घड़ा बीरबल को दे दिया. बीरबल वह घड़ा लेकर किसान के उस खेत पर चला गया, जहाँ वह काम किया करता था. वहाँ उसने कद्दू उगाये थे. उनमें से ही एक छोटे से कद्दू को उठाकर उसने घड़े में डाल दिया. कद्दू अब भी अपनी बेल से लगा हुआ था.

बीरबल उस कद्दू को नियमित रूप से खाद-पानी देने लगा और उसकी अच्छी तरह से देखभाल करने लगा. जिससे धीरे-धीरे कद्दू बढ़ने लगा. कुछ दिनों बाद कद्दू का आकार इतना बड़ा हो गया कि उसे घड़े से बाहर निकाल पाना असंभव था.

कुछ और दिन बीतने के बाद जब कद्दू का आकार घड़े के आकार जितना बड़ा हो गया, तब बीरबल ने उसे उसकी बेल से काटकर अलग किया. घड़े का मुँह कपड़े से ढकने के बाद वह गाँव के मुखिया के पास पहुँचा और वह घड़ा उसे देते हुए बोला, “यह घड़ा बादशाह अकबर को दे देना और उनसे कहना कि इसमें बुद्धि भरी हुई है. उसे बिना काटे और इस घड़े को बिना फोड़े उसे निकाल लीजिये.”

मुखिया बादशाह अकबर के दरबार पहुँचा और उसने अकबर को घड़ा सौंपते हुए वैसा ही कहा, जैसा बीरबल ने उसे कहने के लिए बोला था. अकबर ने जब घड़े के ऊपर से कपड़ा हटाया और उसमें झांककर देखा, तो उसमें उन्हें कद्दू दिखाई दिया. वे समझ गए कि इतनी दूर की सोच सिर्फ़ बीरबल की ही हो सकती है. पूछने पर मुखिया ने बताया कि यह उसके गाँव के एक किसान के खेत में काम करने वाले व्यक्ति ने किया है. अकबर जान चुके थे कि वो व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि बीरबल है. वे तुरंत मुखिया के गाँव गए. वहाँ किसान के घर जाकर बीरबल से मिले और उससे माफ़ी मांगकर वापस दरबार में ले आये.

#6 इत्र की बूंद : अकबर बीरबल की कहानी

फ़ारस के शहंशाह और बादशाह अकबर अक्सर एक-दूसरे को उपहार भेजा करते थे. एक बार उपहार में फ़ारस के शहंशाह ने बादशाह अकबर को एक दुर्लभ किस्म का इत्र भेजा.

इत्र लगाने की चाहत में अकबर (Akbar) अपने कक्ष में गए और इत्र की शीशी खोलने लगे. लेकिन जैसे ही उन्होंने शीशी खोली, इत्र की एक बूंद जमीन पर गिर गई. अकबर फ़ौरन घुटनों के बल बैठ गए और उंगली से समेटकर इत्र की उस बूंद को उठाने लगे. ठीक उसी समय किसी काम से बीरबल कक्ष के अंदर आ गया.

घुटनों के बल बैठे अकबर ने जब बीरबल (Birbal) को अपने सामने पाया, तो वे हड़बड़ा गए. उस हालत में अकबर को देखकर बीरबल मुँह से तो कुछ ना बोला, लेकिन उसकी आँखें हँस रही थी.

अकबर को बेहद शर्मिंदगी महसूस हुई. हिंदुस्तान का बादशाह इत्र की एक बूंद के लिए अपने घुटनों पर आ गया. ये शर्म वाली बात तो थी. अकबर को लगा कि बीरबल अवश्य ऐसा ही कुछ सोच रहा होगा.

उस समय तो वे कुछ न बोल सके. लेकिन उनका मन उन्हें अंदर ही अंदर कचोट रहा था. वे किसी भी तरह बीरबल की अपने प्रति धारणा बदलना चाहते थे.

इसलिए अगले ही दिन अपने शाही हमाम को उन्होंने इत्र से भरवा दिया और एलान करवा दिया कि कोई भी आकर वहाँ से इत्र ले जा सकता है. लोग वहाँ से बाल्टी भर-भरकर इत्र ले जाने लगे.

अकबर ने बीरबल को बुलवा लिया और यह नज़ारा दिखाते हुए बोले, “बीरबल! देखो प्रजा कैसे ख़ुशी से बाल्टी भर-भरकर इत्र ले जा रही है. क्या सोचते हो इस बारे में?”

अकबर की मंशा बीरबल को ये दिखाने की थी कि हिंदुस्तान का बादशाह अकबर इत्र के मामले में कंजूस नहीं है. वह चाहे तो हमाम भर इत्र दान कर सकता है.

बीरबल मंद-मंद मुस्कुराते हुए बस इतना ही बोला, “बूंद से जाती, वो हौज से नहीं आती.” अर्थात् पूरा सागर भर देने के बाद भी वो कभी नहीं लौटता, जो एक बूंद से चला गया हो.

बीरबल ने इस वाक्य के सहारे कह दिया कि अकबर की इत्र का बूंद उठाने की स्वभाविक कंजूस प्रवृत्ति के कारण जो इज्ज़त चली गई है, अब वो पूरा का पूरा सागर भर देने के बाद भी वापस नहीं आ पायेगी.

दोस्तों उम्मीद है आपको यह Top ५ Best Akbar Birbal ki Kahani In Hindi पोस्ट अच्छी लगी होगी। इन्हे अपने मित्रो के साथ भी शेयर करे। धन्यवाद


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